घाटी से चोटी तक
सम्मानीय पाठकगण नमस्कार,
मेरी जीवन यात्रा “घाटी से चोटी तक की अर्वाच मात्र 16 महीने की है। 16 महीने पहले मैं पूरे परिवार के साथ जीवन के उस पड़ाव पर था जहाँ मुझे भविष्य में सिवाय अन्धेरे कुछ और दिखाई नहीं दे रहा था। चहुँ ओर उदासी, निराशा और एक मूक नाउम्मीदी पैर मौलाए हुए थी, जैसे कि शाम के वक्त पहाड़ों पर घाटियों में अन्धेरा मौला हुआ होता है।
हुवा यूंकि जीवन के 40 वर्ष पार करने उपरान्त शरीर ने महसूस करवा दिया कि या तो जिम्मेदारियों का बोझ बढ़ रहा है या फिर शरीर कमजोर हो रहा है। साथ ही पिताजी एवं पत्नी का गिरता स्वास्थ्य मेरी प्रमुख चिंता का विषय बन गया। हालात यहाँ तक पहुँच गए कि पत्नी को घुटने के दर्द की वजह से 300 कदम चल पाना दूभर हो गया, जिससे रोजमर्रा के काम करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था जैसे कि “आड. – पोंछ, कपड़े धोना, बच्चों को विद्यालय के लिए तैयार करना, रसोई के काम-काज इत्यादि।” जब इन मूल भूत कार्यों को ही करने में असमर्थता होने लगें तब खुद पर ध्यान देना तो कोसों दूर की बातें लगने लगती है।
जैसे- जैसे समय बीत रहा था पत्नी का ‘वजन’ भी बढ़ रहा था और साथ ही मेरी चिंता थी। इसी बीच चिंता और चिन्तन में मेरा स्वास्थ्य और गिरने लगा। पत्नी का वजन 94-360 किलोग्राम और मेरा 77KG हो गया।
पत्नी को मोटापे की वजह से
- HIGH B.P, कॉलेस्ट्राल, चिड़चिड़ापन, हरदम थकान, भयंकर घुटनों का दर्द, सिरदर्द, गैस, बदहजमी, लगातार बुखार (आम भाषा में जूरी), एड़ी दर्द
- पैरों की अंगुलियों में सुन्नपन, साइटिका का दर्द, पेट का फूला रहना, साँस चढ़ना, ज्यादा गर्मी लगना, दिन-रात सोने का मन, कमजोरी, टॉन्सिल्स, उल्टे-सीधे हमाल (OVER THINKING), कुछ गलत होने का भय इत्यादि – इत्यादि।
ये सब कारण बने डॉक्टर के पास जाने के। अब सिलसिला
चल पड़ा डॉक्टर और अस्पताल के चक्कर काटने एवं दवाइयों का। पूरे घर के हर कोने में दवाईयाँ। कहीं पिताजी के मादम B.P, आँखों की, गैस की, बुखार की तो कहीं बच्चों के SYRUP जिसमें ANTIBIOTIC, खाँसी, बुखार, आप के कैप्सूल, विम्स स्टीमर, नेबुलाइजर, थर्मामीटर, गर्म पट्टिया, HEA PAD, कोड़े -मुन्सियों के मलहम,
पत्नी की MooulSPRAY, बुखार की गोलियों के पत्ते, टॉन्सिल की दर्वाई, दूसरे मल्टीविटामि घर में घुसते ही डिस्पेन्सरी जैसा अनुभव होता था। फ्रिज खोले तो
दवाईयाँ, रसोई में, लिविंग रूम में, बैडरूम में, गाड़ी में यहाँ तक कि हैंडबैग और ऑफिस बेग एवं स्कूल बैग में भी दवाईयाँ और उनकी महक नाक तथा विभाग में
स्थाई जगह बना चुकी थी। ता उम्र दवाईयों के चलने वाली डॉक्टर की राय ने इस स्थाईत्व पर मोहर लगा दी थी।
अभिमन्यु की भाँति इस चक्रव्यूह वाली घाटी में बुरी तरह फँस चुका था। स्थिति को नियत मानकर कभी इधर तो कभी उच्चर इस घाटी के अन्धेरे में ठोकरें खाता किसब तब तक फिरता रहा, जब तक मेरी मुलाकात मेरे बचपन के लंगोरिया दोस्त से ना हुई।
उनके BODY Transformation (शारीरिक बदलाव) ने अचानक से अन्धेरे में ‘आशा’ की किरण दिखा दी। बाकि की कसर मेरे दोस्त ‘राजकुमार जी’ ने पूरी कर दी। मेंने आव देखा ना ताव तुरंत उनकी सलाह मानकर खुद की हमयम (स्वास्थ्य यात्रा) शुरू कर दी। घाटी से चोटी की ओर हाँ, काफी उतार – चढ़ाव आए परन्तु मेरे मित्र ने मेरा हाथ हमेशा भागकर रखा और लगातार मार्गदर्शन किया। अन्ततः एक दिन नया सवेरा हुआ, मैं सहपरिवार इस यात्रा की चोटी पर पिताजी के सामान्य B.P, पत्नी के सामान्य थाइराइड एवं Full BODY के 100% सामान्य (NORMAL PARAMETER) मापदण्डों के साथ IDEALWEIGHT (63K.G) को प्राप्त करते हुए पहुँच गया। फिलहाल में इस शिखर पर पूरी तरह से दवाईयों से युक्त (100% medicine free) पूरे परिवार के साथ सही मायने में स्वस्थ एवं सुखी जीवन जी रहा है।
मैं सहपरिवार RJ HEALTH and WELLNESS CENTER का तहेदिल से आभारी हूँ। खासतौर पर मेरे Coach | मित्र श्री राजकुमारजी का
साभार
कुमार अरविन्द
